तू जलती है
पर लौ नहीं
तू मशाल है
तू रूह को उज्ज्वलित
करने वाली
एक दिव्यज्योति समान है।
अपनी
क़ीमती आँसुओं की इस क़दर
तौहीन न कर
याद
रख कि
तू भड़कती आग है
भस्म
कर दे उन पापियों
को
किसी
को तुझे बुझाने का
कोई हक़ नहीं।
तू मशाल है
रौशन कर अपनी दुनिया को![Dedicated to someone who has been there through thick and thin and had sacrificed a lot all through her life.]
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