Saturday, 11 February 2017

मशाल

तू जलती है
पर लौ नहीं
तू मशाल है
तू रूह को उज्ज्वलित करने वाली
एक दिव्यज्योति समान है।

अपनी क़ीमती आँसुओं की इस क़दर तौहीन कर
याद रख कि
तू भड़कती आग है
भस्म कर दे उन पापियों को
किसी को तुझे बुझाने का कोई हक़ नहीं।

तू मशाल है
रौशन कर अपनी दुनिया को!

[Dedicated to someone who has been there through thick and thin and had sacrificed a lot all through her life.]